जानिए श्रावणी का महत्व कैसे मनाई जाती है

फर्रुखाबाद-हिन्दू धर्म मे ब्राह्मण समाज के लिए यह रक्षाबंधन त्यौहार बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है।क्योकि हिन्दू धर्म मे चार त्यौहार है।जो चार वर्णों के अलग अलग होते है।जिसमे ब्राह्मणों का रक्षाबंधन, विजयदशमी क्षत्रिय,दीपावली वैश्य,होली शूद्र के लिए होता है लेकिन भारतीय संस्कृति के अनुसार यह सभी समाज के लोग सभी त्यौहार मनाते हैं।
आज श्री कैलाश सेवा संस्थान चैरिटेविल ट्रस्ट के तत्वाधान में पांचाल घाट पर श्रावणी का शाही स्नान का कार्यक्रम रखा गया।जिसमें दर्जनों आचार्यो ने हिस्सा लिया साथ स्वतंत्रता दिवस होने के कारण पहले दुर्वाषा ऋषि आश्रम के सामने गंगा घाट पर स्वामी ईश्वर दास के द्वारा तिरंगा फहराया गया उसके बाद स्नान प्रारम्भ किया गया है।


स्नान विधि -श्रावणी उपाकर्म का कार्यक्रम प्रारम्भ करने के लिए पहले आचार्य संकल्प,फिर दस प्रकार से स्नान,हेमाद्रि संकल्प,तर्पण,विष्णु पूजन,हवन,यजमान को पंचगव्य प्रसाद,चाहे तो यजमान का मुंडन करा सकता है। कौन कौन सी बस्तु से किया जाता स्नान जानिए-भष्म स्नान,मृतिका स्नान,गौ गोबर स्नान,पंचगव्य स्नान,गौ रज स्नान,धान्य स्नान,सप्तधान्य स्नान,फल स्नान,सर्व औषधि स्नान,कुशा स्नान,स्वर्ण स्नान।
श्रावणी उपाकर्म क्यो मनाते हैं जानिए-यह त्यौहार इसलिए मनाया जाता है क्योंकि आज के दिन गायत्री जयंती है।साथ इस त्यौहार में शालीग्राम भगवान का पूजन मुख्य रूप से किया जाता है।साथ ही सप्तऋषि,अरुणधति जो मुनि बशिष्ठ की पत्नी ने भगवान के रक्षा सूत्र बाधा था।भारतीय परंपरा के अनुसार यह त्यौहार सभी मनाते हैं। पांचाल घाट गंगा तट दुर्वाषा ऋषि के सामने श्री कैलाश चेरिटेविल ट्रस्ट द्वारा श्रावणी उपाकर्म के कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें जिले से लेकर कई जिलों के ब्राह्मणों ने प्रतिभाग किया इसके साथ साथ आर्ट आफ लिविंग आश्रम के वेद अध्ययन कर छात्रों ने वेद मंत्रों से सभी को अपनी ओर आकर्षित किया है।कार्यक्रम का शुभारंभ आचार्य प्रदीप नारायण शुक्ल के द्वारा किया गया।सबसे पहले भस्म स्नान,दही स्नान,गौ मूत्र स्नान,गोबर स्नान,चन्दन स्नान,फल स्नान,अन्न स्नान,गौ रज स्नान सहित स्नान किया गया।फिर सभी ब्राह्मणों ने ऋषियो को प्रसन्न करने के लिए उनका आवाहन किया
जो ब्राह्मण जनेऊ साल भर जनेऊ का इस्तेमाल करते है उन लोगो ने हबन पर बैठ कर वेद मंत्रों ने जनेऊ को अभिमन्त्रित किया।डॉक्टर ओमकार नाथ शास्त्री ने बताया कि श्रावणी उपाकर्म का मतलब होता है कि साल भर में हम लोगो से अनजाने में जो पाप होते है उनके निदान के लिए साल में एक ही दिन माना गया है।इस दिन सभी ब्राह्मण मुंडन संस्कार कराने के बाद वेद में लिखित मन्त्रो से दस प्रकार से स्नान करते है।दूसरी तरफ गायत्री माता वेदों को उत्पन्न करने वाली आज के दिन उनकी जयंती के रूप में भी मनाते हैं।हमारे हिन्दू धर्म मे जो भी वेद पुराण है वह सभी संस्क्रत में है इसलिए आज के दिन को संस्कृत दिवस के रूप में भी मनाते हैं।क्योंकि मानव शरीर होने के कारण अनजाने में हम लोग बहुत पाप करते है जो हम लोगो को मालूम नही हो पाते है।उनके समाधान वेद मंत्रों द्वारा ही किया जाता है।कार्यक्रम के बाद में सभी को प्रसाद वितरण किया गया

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