बारिश से फसल को बड़ा नुकसान, आलू में दिख रहा रोग

चार साल से आलू की बर्बादी का दंश झेल रहे किसानों पर आफत की बारिश ने कहर बरपा दिया है। खेत के जौहरा में पानी भरा हुआ है। फसल पिछैती झुलसा के साथ-साथ जड़ गलन रोग की चपेट में है। इससे किसानों की नींद उड़ी हुई है। कृषि विशेषज्ञ और प्रगतिशील किसानों का कहना है कि साल 2019-20 में आलू की फसल का रकवा भी दस फीसदी गिर गया है। ऐसे में रोग फैलने से उत्पादन पर बड़ा प्रभाव पड़ेगा। 

उत्तर प्रदेश के आलू उत्पादन में आगरा मंडल की अहम भूमिका होती है। प्रदेश के आलू उत्पादन का 28 फीसदी आलू आगरा मंडल में उत्पादित किया जाता है। पिछले चार साल से आलू में घाटा झेल रहे किसानों ने इस वर्ष आलू से मुंह मोड़ लिया था। इसके कारण जिले में साल 2018-19 में 71 हजार हेक्टेयर आलू उत्पादन था। साल 2019-20 में महज 67 हजार हेक्टेयर रह गया है। इस वर्ष किसानों ने 65 हजार हेक्टेयर में सरसों की फसल की है। विगत दिसंबर और 16 जनवरी को हुई बारिश से आलू की फसल में बड़ा नुकसान हुआ है। जिले में करीब 15 फीसदी आलू की फसल झुलसा के साथ-साथ जड़ गलन रोग की चपेट में है। गांव-गांव किसानों के बीच झुलसा रोग का शोर मचा है। रोग ने किसानों की नींद उड़ा दी है।

प्रगतिशील किसान लाखन सिंह त्यागी ने बताया कि आलू की फसल में झुलसा के साथ जड़ गलन रोग का काफी असर है। किसान आलू के पौधों की पत्तियां देख रहे हैं। यदि वे पौधों को उखाड़कर देखेंगे तो जड़ में कालापन नजर आएगा। फसल में रोग आने का प्रमुख कारण बारिश और ओलावृष्टि है। मिट्टी में नमी है। मौसम अनुकूल न मिलने के कारण पौधे जड़ एवं तना गलन रोग की चपेट में आ गए हैं। रोग के कारण पौधों का विकास प्रभावित हो गया है। पौधे कमजोर होने लगे हैं और उनमें पीलापन आने लगा। इससे अब झुलसा रोग के लक्षण दिखाई देने लगे हैं। 

15 फीसदी फसल रोग से ग्रसित
लाखन सिंह त्यागी ने बताया कि जिले में औसतन 10-15 फीसदी फसल रोग से ग्रसित हो गई है। आलू की फसल में अभी तक कंद 60 से 70 फीसदी तक फूला है। बुबाई से अब तक फसल औसतन 60-70 दिन की हुई है। कंदों को पूर्ण विकसित करने के लिए फसल को लगभग एक महीने का समय चाहिए। जिस तरह से रोग की चपेट में फसल आ रही है, उससे फसल की औसतन पैदावार में 20-25 प्रतिशत तक कमी आएगी। कंद का पूरा फुलाव न होने के कारण आलू का साइज छोटा रह जाएगा। इससे उत्पादन पर बड़ा असर पड़ेगा। आलू का साइज गुल्ला और किर्री (सबसे छोटा) का होगा। इससे पैदावार कम हो जाती है। 

दवा के छिड़काव से हालात होंगे काबू
कृषि विशेषज्ञ यतेंद्र सिंह के मुताबिक बेमौसम बारिश ने आलू की फसल में रोग आने की स्थिति पहले ही बना दी। फसल में झुलसा के साथ जड़ गलन रोग भी है। इसके कारण पौधों की ऐसी हालत बनी हुई है। कुछ खेतों में जड़ गलन के कारण पौधों का विकास रुक चुका है। रोग आने पर दवा का प्रभाव उतना तेजी से नहीं होता है, जितना रोग आने से पहले छिड़काव करने पर होता है। झुलसा रोग एक खेत से दूसरे खेत में पहुंच जाता है। किसान दवाओं का छिड़काव करें। इससे रोग दूसरे स्वस्थ्य पौधे को प्रभावित नहीं करेगा। इन रोगों की कारण फसल की पैदावार में अच्छी खासी कमी आती है। पौधे और कंदों का विकास प्रभावित होता है।

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