आखिर क्या है भद्रा काल, इसमें क्यों नहीं बंधवाते हैं राखी

रक्षाबंधन का त्योहार श्रावण मास में शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इसे सलूनों भी कहा जाता है। रक्षाबंधन में मुहुर्त का विशेष महत्व होता है। इसी के साथ राखी बंधवाते समय अगर किसी चीज का विशेष ख्याल रखा जाता है तो वह है भद्रा काल। शास्त्रों के अनुसार राहुकाल और भद्रा के समय शुभकार्य नहीं किये जाते हैं। इसी के चलते भद्रा के समय राखी भी नहीं बंधवाने की पौराणिक मान्यता है।

बताया जाता है कि लंकापति रावण ने अपनी बहन से भद्रा के दौरान ही राखी बंधवाई थी जिसके चलते ही उसका विनाश हो गया था। इसलिए इस समय को छोड़कर रक्षाबंधन के दिन राखी बंधवाने का चलन है। वहीं कुछ लोगों का मत यह भी है कि भद्रा शनि महाराज की बहन है। उन्हें ब्रह्माजी से श्राप मिला था कि जो भी व्यक्ति भद्रा में शुभ कार्य करेगा उसका परिणाम अशुभ ही होगा। जिसके चलते यह भद्रा के समय राखी नहीं बंधवाई जाती है। भद्रा के साथ ही राहुकाल में भी राखी नहीं बंधवाई जाती है।

क्या है मुहुर्त
सुबह 9 बजे से 10.22 बजे तक।
दोपहर 1.40 बजे से सायं 6.37 बजे तक।

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