खुला खेल फर्रुखाबादी भाग 21 -लेखक अनिल मिश्र एडवोकेट


स्व० रामनरायन आज़ाद की बहादुरी देशभक्ति की भावना बेमिसाल थी जिसके किस्से आज भी मशहूर है उनके पौत्र बॉबी दुबे जो इस वक्त राष्ट्रीय स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी वंशज समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी है,उनके व स्व०चंद्रशेखर आज़ाद जी के साथ की क्रांतिकारी गतिविधियों के कारनामे सुनाते हुए बताते हैं कि ब्रिटिश सरकार की खुपिया रिपोर्ट में स्व०रामनरायन आज़ाद का नाम बड़े क्रांतिकारियों में शुमार किया गया था। एक बार कानपुर की लक्ष्मण दास धर्मशाला में स्व०चंद्र शेखर आज़ाद के गुप्त रूप से पहुंचने की जानकारी पर स्व०रामनरायन जी भी पहुंचे थे तभी पुलिस ने दोनों को पकड़ लिया था नाम पूछने पर प्रत्युतपन्न मति से स्व० रामनरायन जी ने अपना नाम चंद्र शेखर आज़ाद बता कर पकड़वा दिया था

आज़ाद जी वहां से निकल गए थे और रामनरायन जी को एक वर्ष की कैद की सज़ा मिली थी। स्व०रामनरायन जी बड़े अलमस्त स्वभाव के व्यक्ति थे बताते हैं एक बार कानपुर के तत्कालीन अंग्रेज जिलाधिकारी को मारने की योजना के साथ उसके बंगले पहुंचे थे लेकिन उसके न मिलने पर खीझ में उसके पालतू कुत्ते को जो उसे बहुत प्यारा था को ही उठा लाये थे और रंग कर अपने यहां रख लिया था।

तत्सम स्व०रामनरायन आज़ाद के पौत्र बॉबी दुबे @पुनीत दुबे शहीदों एवम क्रांतिकारियों के वंशजो के मान सम्मान, स्वाभिमान, एवम हक हकूक की लड़ाई हेतु सतत संघर्षशील है। क्रांतिकारियों के वंशजों से सम्बंधित कई संस्थाओं में वह राष्ट्रीय स्तर के पदाधिकारी भी है यथा ऐलाने इंकलाब के राष्ट्रीय चीफ कमांडर ,स्वाधीनता संग्राम वंशज के राष्ट्रीय महामंत्री,शहीद भगत सिंह ब्रिग्रेड के राष्ट्रीय संरक्षक के रूप में हिंदुस्तान के कोने कोने में घूम कर कभी हरियाणा,कभी पंजाब कभी पश्चिम बंगाल तो कभी नाइ दिल्ली घूम घूम कर फर्रुखाबाद के इस नौजवान ने क्रांतिकारियों के परिवारीजनों के मान सम्मान, स्वाभिमान एवम हक हकूक की लड़ाई की अलख जग रखी है

जिसमें इनका साथ दे रहे है,शहीद भगत सिंह,शहीद रोशन सिंह,आजीवन सजाये कालापानी गया प्रसाद कटियार,काकोरी कांड के आजीवन सजाये कालापानी राम कृष्ण खत्री,सजाये कालापानी शचीन्द्र नाथ बख्शी,क्रांतिवीर मणीन्द्र नाथ बनर्जी,अमर शहीद चंद्र शेखर आज़ाद जैसे राष्ट्रीय स्तर के क्रांतिकारियों के पुत्र,पौत्र एवम परिवारी जन।”बाँगबां को जो खूं की जरूरत पड़ी,सबसे पहले ही गर्दन हमारी कटी, बावजूद इसके कहते हो अहले चमन यह चमन है हमारा तुम्हारा नहीं” (क्रमशः)
कुछ ज्वलंत यक्ष प्रश्न अगली किश्त में।

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