खुला खेल भाग 24- अनिल मिश्र एडवोकेट


पिछली किश्त में आपने पढ़ा खाकी वर्दी के पीछे धड़कते दिल की कहानी, क्या क्या दर्द है,क्या परेशानियां है किन किन बाधाओं का,कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है एक पुलिस कर्मचारी/अधिकारी को,और उसके बाद कोई अच्छा काम करने के बाद भी प्रशंसा के दो बोल जो उस समय उसका हक बनता है को भी सुनने को उसके कान तरस जाते हैं।लेकिन इसके वरक्ष आम लोगों ने पिछली अवधारणाओं को पलटते हुए साल भर पहले जिस तरह से कोरोना की लहर के दौरान कोरोना वारियर पुलिस कर्मियों का उनके कार्यों का मूल्यांकन करते हुए समारोह कर करके स्वागत सम्मान अभिनन्दन किया वो भी समाज के न्यायप्रिय स्वभाव,सोच को उजागर करने वाली रही।कोरोना काल के दौरान कोविड 19 से समाज का प्रत्येक तबका चाहे वो डॉक्टर हों,नर्सेज आदि स्वास्थ्य कर्मी हो,पुलिस वाले हों,सफाईकर्मी हों,बैंककर्मी,प्रेस के लोग,प्रशासनिक कर्मचारी अधिकारीगण,स्वयमसेवी संगठन के सदस्य हो आदि सभी ने अपनी जान की परवाह करे बगैर कोरोना से लड़ाई में मानवता की हिफाजत की लड़ाई पहली पंक्ति के योद्धा के रूप में लड़ी थी जिनमे से कई शहीद भी हुए थे।


कोरोना का ख्याल आते ही जहन में आया कि कोरोना की लहर की वापसी दोबारा हुई है,फिर से एकजुट होकर इससे संघर्ष करना है,दोबारा वापसी क्यों हो रही है कहाँ कहाँ किस किस स्तर पर कब कब और क्यों कैसी कैसी चूक असावधानियाँ रही यह सब विचारणीय प्रश्न तो हैं ही फिलहाल तो हम सबको अलग ही हौसले,आत्मबल,उत्साह,धैर्य,साहस के साथ इसका मुकाबला करना है। सैलानी के संवेदनशील कवि ह्रदय में भी कुछ सामयिक उपयोगी पंक्तियों ने जन्म लिया।प्रस्तुत हैं। सदियों से हम लड़ते आये आन बान और शान पे, कोरोना से आज लड़ेंगे हम सब सीना तान के I आसमान की ऊंचाई नापी और सागर की गहराई , जुल्म एवं अन्याय के आगे झुके कभी ना पीठ दिखाई। आदर्शो में रख के आस्था कभी न कुछ चाहा ज्यादा, सच्चाई और धर्म राह पर चलना है अपनी मर्यादा l हम भारत वासी सन्ताने है राम कृष्ण गौतम गांधी के, वक्त पड़े तो टकरा जाते हैं महाकाल की आंधी से l काम क्रोध मद मोह लोभ संग जीता है मनोविकारों को, सदियो को जीता लड़ कर के जीता लम्हात हजारो को। धर्मयुद्ध में निकल पड़े है फिर विजय सुनिश्चित जान के कोरोना से आज कोरोना से लड़ने को जो जो तबका आगे आया जान हथेली पर रख कर कर्मयुद्ध मैं जौहर दिखलाया।

*कोरोना से लड़ने को जो जो तबका आगे आया
जान हथेली पर रख कर कर्मयुद्ध मैं जौहर दिखलाया।
डॉक्टर पुलिस सफाईकर्मीऔर सरकारी योद्धा l
खुद की जान डाल खतरे में सारा देश बचाया ll
इन सबके आगे सारा भारत है शीश झुकाता l
इनकी त्याग तपस्या लख कर नतमस्तक हो जाता ll
जब तक सूरज चाँद रहेगा गंगा जमुना में पानी l
दुनिया इसको याद रखेगी सुनो वीर सेनानी ll
मौत के मुहँ में कूद पड़े थे जो सब कुछ जान के ।
कोरोना से आज लड़ेंगे हम सब सीना तान के..।।
कोरोना से लड़ने को है एक अस्त्र सब पर भारी।
छोड़ो बाहर की निकल पैठ घर से ही रखो यारी।।।
घर में रह कर भी खास काम ये करना होगा ।
घण्टे आधे घण्टे में हाँथों को साबुन से धोना होगा।।
कम से कम 20 सेकेंडो तक साबुन खूब रगड़ना।
यह सब करने मे किंचित भी कोताही ना करना।।
आंख,नाक और मुहँ में धोखे से भी ना हाँथ लगाना।
अगर चाहते हो कोरोना को जड़ से समूल मिटाना।।
मुँह पर मास्क और हांथो में दस्ताने पहनो शान से।
कोरोना से आज लड़ेंगे फिर हम सब सीना तान के।।


अनिल मिश्र एडवोकेट फर्रुखाबाद उ०प्र० मो०न०-9455065444

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