गणपति पूजा में जरूर शामिल करें इन चीजों को, पूरी होगी मनोकामनाएं

गणेश चतुर्थी का त्योहार पूरे भारतवर्ष में उमंग के साथ मनाया जाता है। यहीं नहीं अब इस त्योहार को विदेश में रहने वाले भारतीय लोग भी मनाने लगे हैं। भाद्रपद की चतुर्थी को इस त्योहार को मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन गणेश जी का जन्म हुआ था। गणेश जी को विध्नहर्ता कहा गया है। इनकी पूजा से कई बाधाएं दूर हो जाती हैं। इस साल गणेश चतुर्थी का त्योहार 2 सितंबर को मनाई जाएगी।गणेश जी ही एक ऐसे देवता है जिनका नाम किसी भी पूजा या शुभ काम में सबसे पहले लिया जाता है। कहते हैं जो लोग गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणपति को अपने घर बुलाते हैं और पूरी श्रद्धा से गणेश जी का पूजन करते हैं उनके सभी दुख दूर हो जाते हैं।गणेश जी को विनायक भी कहा जाता है। इसका मतलब होता है विशिष्ट नायक। गणेश जी के पूजा में दूर्वा का विशेष महत्व होता है। बिना दूर्वा के इनकी पूजा अधूरी मानी जाती है।इसके साथ ही गणपति को मोदक भी प्रिय है। मोदक का मतलब होता है। मोद आनंद इसे गणेश जी को अर्पित करने से वह प्रसन्न होकर आपकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।गणेश जी का पूजन करने से लोगों की बुद्धि सही होती है। मन साफ होता है। लोग अपनी इच्छाओं को पूरी करने के लिए साफ मन से गणपति की आराधना करते हैं। जिससे बप्पा खुश होकर उन्हें आशीर्वाद देते हैं।

गणपति बप्पा मोरया: 15 रोचक बातें

1- भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को गणेश चतुर्थी मनाई जाती है। गणेश पुराण के अनुसार इसी दिन भगवान गणेश का जन्म हुआ था।
2- गणेश चतुर्थी महाराष्ट्र का सबसे बड़ा त्योहार है। यहां दस दिनों तक गणेश महोत्सव मनाया जाता है।
3- भगवान गणेश ऐसे देवता हैं जो भौतिक और आध्यात्मिक दोनों तरह के फल देते हैं।
4- गणेश चतुर्थी की पूजा करने से व्यक्ति के 21 तरह के दुखों का नाश होता है।
5- भगवान गणेश को दूर्वा बहुत ही प्रिय होती है। दूर्वा चढ़ाने से हर किसी की मनोकामना पूरी होती है।
6- भगवान गणेश का वाहन चूहा है और बैठे रहने की आदत है।
7- किसी भी शुभ कार्य में सबसे पहले पूजा भगवान गणेश की होती है।
8- चतुर्थी तिथि, स्वस्तिक का चिन्ह, मोदक और लाल रंग के फूल इन्हें बहुत ही प्रिय होता है।
9- पूर्व की दिशा और लेखन में भगवान गणेश की रुचि है।
10- मनोकामनों की पूर्ति भगवान गणेश बहुत ही जल्दी करते हैं।
11- गणों के स्वामी होने के कारण उनका नाम गणपति है।
12- ज्योतिष में गणेश केतु का देवता माना जाता है।
13 – गणेश जी 12 नाम प्रमुख हैं सुमुख, एकदंत, कपिल, गजकर्णक, लंबोदर, विकट, विघ्न-नाश, विनायक, धूम्रकेतु, गणाध्यक्ष, भालचंद्र, गजानन
14- गणेश जी के पिता- भगवान शंकर, माता- भगवती पार्वती, भाई- श्री कार्तिकेय (बड़े भाई), बहन- -अशोकसुन्दरी, पत्नी- ऋद्धि और सिद्धि, पुत्र दो शुभ और लाभ
15- गणेश चतुर्थी उत्सव शिवाजी के समय में एक सार्वजनिक समारोह के रूप में मनाया जाता था।

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