राजस्थानी कलाकार प्रथम देवता गणेश की प्रतिमाओं को सभारने में जुटे

फर्रुखाबाद में गणेश चतुर्थी पर रिद्धि-सिद्धि के दाता विघ्नहर्ता गणपति गजानन पूरी शान से विराजेंगे। राजस्थान के कलाकार प्रथम देवता गणेश की प्रतिमाओं को पूरे भाव से तैयार करने में जुटे हैं। छोटी मूर्ति से लेकर छह फीट तक की प्रतिमाओं को बनाकर उनमें आकर्षक रंग भरे जा रहे। मूर्त्रीकारो का कहना है की मूर्ती को रंग करने में एको फ्रेंडली रंगों का प्रयोग किया जा रहा है। जूट, प्लास्टर ऑफ़ पेरिस,खड़िया और बांस के ढांचे से मूर्ती तैयार की जा रही है। कोरोना के प्रकोप के चलते विगत वर्षों में तो मूर्तिकारों और दुकानदारों को काफी नुकसान हुआ| लेकिन इस बार माहौल सब ठीक होनें से दुकानदार गणपति से शुभ-लाभ की कामना कर रहे है| बाजारों में भगवान गणेश की मूर्तियों की बिक्री भी शुरू हो गयी। छोटी मूर्तियों की पिछले सालों के मुकाबले मांग अधिक है।

10 सितम्बर को गणेश चतुर्थी मनाई जाएगी। आवास विकास तिराहे से नेकपुर के बीच राजस्थानी मूर्तिकार इस समय गजानन की मूर्तियों को अनुपम छटा देने में जुटे हैं। शुभ माने जाने वाले रंगों से प्रतिमाओं की सजावट की जा रही है। गणेश पांडालों में स्थापित की जाने वाली प्रतिमाओं को बड़े रूप में बनाया गया है। सड़क किनारे लगी प्रतिमाएं लोगों का मनमोह रही हैं। मूर्तियों को तैयार करने में राजस्थानी परिवारों की महिलाएं और बच्चे भी हाथ बटा रहे। मूर्तिकारों का कहना है कि मूर्ति तैयार करने में लगने वाले कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोत्तरी हुई है। दो सौ रुपये से लेकर 12 हजार रुपये लागत में प्रतिमाएं तैयार हो रही हैं। गणेश चतुर्थी के कुछ दिन ही रह जाने से ग्राहक भी आने लगे हैं।

जैसा कि नाम से पता चलता है, इस शुभ अवसर पर लोग विघ्नहर्ता, भगवान गणेश की पूजा करते हैं। कैलाश पर्वत से उनकी माता पार्वती के साथ उनके आगमन को गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। स्कंद पुराण, नारद पुराण और ब्रह्म वैवर्त पुराण में भी भगवान गणेश की महिमा की गई है। उन्हें ज्ञान और बाधा निवारण के देवता के रूप में पूजा जाता है। इसलिए उन्हें विघ्नहर्ता के रूप में जाना जाता है । जहां ‘विघ्न’ का अर्थ है बाधाएं और ‘हर्ता’ का अर्थ है जो उन्हें दूर करता है। कोई नया काम या शादी जैसे कुछ नया शुरू करने से पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है।

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