विघ्नहर्ता को उल्लास और उमंग के साथ भक्तों ने दी विदाई

गणपति बप्पा की पूजा-अर्चना और भक्ति में 9 दिन गुजरने का पता ही नहीं चला। गणेश चतुर्थी को बप्पा पंडालों और घरों में पधारे थे। भक्तों ने उनकी सेवा में कोई कसर नहीं छोड़ी। बप्पा को विदा करने की घड़ी आई तो श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गई, हालांकि श्रद्धा भाव से लबालब भक्तों ने उल्लास के साथ विदाई दी। शोभायात्रा निकालकर डीजे, ढोल, बैंड-बाजे पर नाचते और अबीर-गुलाल उड़ाते हुए पांचालघाट तक पहुंचे।


10 सितंबर यानी गणेश चतुर्थी को श्रद्धालु उल्लास के साथ बप्पा को घरों एवं पंडालों में लेकर आए थे। विधि-विधान के साथ उनकी मूर्ति को स्थापित किया गया था। काफी घरों और पंडालों से पांच, सात और नौ दिन बाद गणपति को विदाई दी गई।श्री गणेश महाराज जी की प्रतिमा की पूजा अर्चना करने के बाद शोभायात्रा निकाली गई। श्री गणेश जी के श्रद्धालुओं ने जहां शहर में श्री गणेश की मूर्ति विराजमान करके उनकी सुबह व शाम को पूजा जारी रखी हुई है। वहीं, कुछ भक्तों ने अपने घरों में उनकी पूजा के बाद विसर्जन करना भी शुरू कर दिया है। इस दौरान श्रद्धालुओं ने गणेश जी की प्रतिमा के आगे नतमस्तक होकर आशीर्वाद लिया।

बप्पा की विसर्जन यात्रा गाजे-बाजे और ढ़ोल-डीजे के साथ निकली। श्रद्धालुओं ने खूब अबीर-गुलाल उड़ाया और भजनों पर जमकर थिरके। चहुंओर ओर’गणपति बप्पा मोरया, मंगल मूर्ति मोरया’ जयकारे की गूंज थी। अगले बरस जल्दी आने की कामना के साथ विघ्नहर्ता की मूर्ति को विसर्जित किया गया। पांचाल घाट पर आज लगभग एक सैकड़ा गणेश प्रतिमा की श्रद्धा से शोभायात्रा निकाल कर बिसर्जन किया गया| इस दौरान भक्तों ने भगवान श्री गणेश जी के जयघोष भी लगाए। साथ ही भक्तों ने उन्हें अगले साल फिर आने का न्योता दिया। गणेश चतुर्थी से श्रद्धालुओं ने घरों और मंदिरों में गणपति जी की मूर्तिओं को स्थापित किया है। श्रद्धालुओं के द्वारा विधि-विधान से गणपति जी की पूजा अर्चना की जा रही है।

Share