अधिकारियों ने रिश्वत लेकर 125 एकड़ जमीन अमजद पट्टा धारक को बेची

फर्रुखाबाद की तहसील अमृतपुर के सबलपुर गांव में फर्जी पट्टों 125 एकड़ भूमि के पट्टे फर्जी ढंग से दूसरों के नाम कराने के मामले में जिला प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है। एसडीएम के पूर्व पेशकार के निलंबन के बाद अब तहसील स्तरीय अधिकारियों और कर्मचारियों पर गाज गिरना तय है। इसके साथ ही सबलपुर के पूर्व प्रधान की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। डीएम ने तहसीलदार को पूरे प्रकरण में एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में जांच कमेटी ने पूरे प्रकरण की जांच कर एक माह में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं।

जिले के तेजतर्रार जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह से ग्राम प्रधान सुमन गुप्ता ने शिकायत की थी जिसकी जांच में पाया गया दो एसडीएम ने 14 लाख रुपए की रिश्वत लेकर पट्टा धारकों को फर्जी पट्टे प्रेषित कर दिए इसकी भनक लगते ही जिले के तेजतर्रार जिला अधिकारी मानवेंद्र सिंह ने मुख्य विकास अधिकारी के साथ टीम गठित कर एसडीएम तहसीलदार व अन्य लोगों की 1 महीने में रिपोर्ट मांगी है । इसको लेकर जब जांच शुरू की गयी तो परतें दर परतें उधड़ती चली गई और इसमें कई जिम्मेदारों की गर्दनें फंस गई। इस पूरे मामले में एसडीएम विजेंद्र नरेंद्र के पूर्व पेशकार शिशुपाल को पहले ही निलंबित करने के निर्देश दिए गए। अपनी गर्दन को बचाने के लिए शिशुपाल सिंह की ओर से मौजूदा पेशकार कौशंलेंद्र कुमार को चार्ज नहीं दिया जा रहा था। इसके पीछे भी कई प्रकार के सवाल उठे थे।

जब डीएम ने यहां पर कड़ा रुख अपनाया तो इसके बाद 125 एकड़ भूमि के पट्टे के मामले में प्रथम दृष्टया कई प्रकार की अनियतिताएं सामने आईं। पहले तो इस प्रकरण को तहसील स्तरीय अधिकारियों ने दबाने का प्रयास किया था। शिकायतकर्ताओं से भी संपर्क साधने की भी चर्चा बताई गई। जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह ने बताया कि सबलपुर गांव में फर्जी और कूटरचित अभिलेखों में भूमिधरों के नाम दर्ज कराए जाने संबंधी जांच कराई गई जिसमें देखा गया कि कूटरचित अभिलेखों के आधार पर भूमिधरों के नाम दर्ज कराकर भूमिधरी अधिकार पाने का प्रयास किया गया है ।इस प्रकरण में तहसील के अधिकारियों, कर्मचारियों के साथ सबलपुर के पूर्व प्रधान की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। डीएम ने बताया कि सीडीओ की अध्यक्षता में समिति गठित की गयी है। इसमें अपर जिलाधिकारी,एसडीएम कायमगंज को दोबारा से गंभीरता से जांच कर एक माह में अपनी रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

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