अपनो की चाहत में विदेश की नौकरी छोड़ कर वापस लौटा युवा वैज्ञानिक

देश में कृषि विज्ञान की पढ़ाई कर विदेश में बसे किसान के  वैज्ञानिक बेटे ने आखिर अपनों की चाहत में अपने देश का रुख किया और एक छोटे से गांव में रहकर किसानों को खेती का प्रशिक्षण देकर किसानों के चेहरे पर खुशी ला दी है। वह फर्रुखाबाद, कन्नौज समेत आसपास के कई जिलों में उन्नत बीजों के इस्तेमाल से आलू की पैदावार को दोगुना कर किसानों की आय भी दोगुनी कर दी है| युवा वैज्ञानिक राहुल पाल ईस्ट अफ्रीका में कृषि वैज्ञानिक की नौकरी छोड़कर फर्रुखाबाद  के गंगा किनारे बसे छोटे से गांव सिंगी रामपुर में प्रयोगशाला खोलकर स्थानीय किसानों को उन्नत खेती के गुर सिखा  रहा है।

– स्थानीय किसानों को काफी लाभ भी मिल रहा है।फर्रुखाबाद निवासी किसान के बेटे राहुल पॉल ने कृषि विज्ञान की पढ़ाई कर ईस्ट अफ्रीका में कृषि वैज्ञानिक की नौकरी कर रहे थे।लेकिन जब उनको ख्याल आया कि हम अपने ही देश रह कर किसानों को प्रशिक्षण देकर किसानों को लाभ दे।आखिर वह अपने गांव लौट आए और गांव में प्रयोगशाला खोल कर किसानों को उन्नत खेती का प्रशिक्षण देने लगे व टिशू कल्चर बेस बीज का उत्पादन कर किसानों को बीज उपलब्ध कराने लगे।आस पास के लगभग दो हज़ार से अधिक किसान उनसे जुड़ कर लाभान्वित हो रहे है।टिशू कल्चर बेस बीज व जैविक खेती से वह आलू, केला,सहित सब्ज़ी व फलों की खेती को बढ़ावा दे रहे।वहीं चंदन की भी कई प्रजातियों के पेड़ों की खेती का प्रशिक्षण दे रहे है।प्रशिक्षण पाकर किसानो की उपज भी काफी बढ़ गयी है। उनके इस प्रयास से क्षेत्र के किसान उन्नति खेती के तौर तरीके भी सीख रहे है वहीं किसानों को खेती अब लाभ का सौदा भी लगने लगी है।फिलहाल युवा वैज्ञानिक के आने क्षेत्र में वापस आने से इलाके के किसान खुश है कि अब खेती एक घाटे का सौदा न रह कर फायदे का सौदा भी नज़र आने लगी है।

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