कोरोना का असर रावण पर

कोरोना का असर रावण पर इस कदर हुआ की कि रावण को भी अपना आकार छोटा करना पड़ा और इसी के चलते बड़े रावण के दहन को न देख अपने निजी छोटे रावण का दहन कर बुराई पर अच्छाई की जीत का जश्न मना सकते है दशहरा या विजयदशमी का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है. हिंदू धर्म में दशहरा के पर्व का विशेष महत्व है. इस साल दशहरा 15 अक्टूबर को मनाया जाएगा.वहीं फर्रुखाबाद जिले में कोरोना संक्रमण के चलते दशहरे पर इस बार भी बड़े आयोजन नहीं होंगे। प्रशासन ने सार्वजनिक रावण दहन की अनुमति नहीं दी है। हां, गली-मोहल्ले में छोटे रावण दहन किए जा सकेंगे। जिले में लगातार ये दूसरा साल है, जब प्रशासन ने दशहरे पर बड़े आयोजन की अनुमति नहीं दी है।जिसके असर के चलते रावण के पुतलो का आकार छोटा हो गया है और कोरोना का असर रावण के पुतलो पर साफ़ देखा जा रहा है बही दूसरी तरफ लोगो को छोटे छोटे रावण के पुतले बनाने पर अच्छी खासी कमाई भी होती जा रही है ।

इस बार जिले में कोरोना संक्रमण की वजह से अब तक त्योहारों की चमक फीकी रही है। हालांकि दूसरी लहर के बाद अब प्रशासन ने काफी हद तक ढील दी है। गणेश प्रतिमा स्थापना के साथ ही नवरात्रि में दुर्गा प्रतिमा स्थापित करने और दुर्गोत्सव के आयोजन को लेकर जरूरी दिशा निर्देश दिए गए थे। इस बार भी रावण दहन के सभी आयोजनों को रद्द कर दिया गया है। प्रशासन ने निजी आयोजकों को भी रावण दहन करने की अनुमति दी है। जो की गली मोहल्लो में अपने रावण के पुतलो का दहन कर सकते है। लेकिन कोरोना संक्रमण के चलते पिछले साल से यह आयोजन नहीं हो पा रहा है। यहां रामलीला मंचन के बाद रावण का दहन किया जाता था। इस रावण दहन और रामलीला को देखने दूर-दूर से लोग पहुंचते थे। लेकिन इस बार लोगो रावण दहन का दूसरा तोड़ निकाल लिया और अपने मोहल्लो में अपने अपने रावण दहन की तयारी शुरू कर दी है जिसमे एक स्थान पर बड़े पैमाने पर भीड़ भी नहीं लगेगी और रावण दहन का त्यौहार भी धूमधाम से मनाया जा सकेगा। इधर, रावण बनाने वाले कलाकारों का कहना है कि लोग 30  से 35  फीट के रावण के पुतले भले ही नियमों की वजह से नहीं लेंगे, लेकिन 9  फीट के पुतले तो लेंगे ही। वहीं तीन-तीन फीट के पुतले हमेशा ही बच्चों की पसंद रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए कारीगर पुतलों को आकार देना शुरू कर दिया है। जिनकी कीमत 1 हजार से लेकर 5 हजार रुपये तक है। बही लोगो के हिसाव से भी पुतलो का आकार बढ़ा कर 15 फ़ीट तक किया जाने के आर्डर पर त्यार किये जा रहे है

वहीं कारीगरों का कहना है कि हमें तो उम्मीद है कि घरों में दशहरा मनेगा और लोग घरों में उत्सव मनाने के लिए रावण के पुतले खरीदेंगे। इसी उम्मीद में अभी से दशहरा की तैयारियां शुरू कर दी गई है और पुतले बना रहे हैं। हम ज्यादातर तीन-तीन फीट के पुतले बना रहे हैं। हम ऑर्डर के हिसाब से भी रावण तैयार कर रहे हैं। कारीगरों की माने तो काफी मात्रा में पुतलो की बिक्री हो चुकी है और कई रोड किनारे लगे होने पर देख कर लोग खरीद ले रहे है जिसमे अच्छी खासी कमाई हो रही है

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