श्रीमहाकाल मंदिर में नागपति वासुक के प्राकट्योत्सव पर विशेष पूजन

पूरे भारत में आज नागपंचमी मनाई जा रही है। हिन्दी और संस्कृत में नाग का मतलब सांप है और नागों को समर्पित इस त्योहार के दिन उनकी पूजा की जाती है। हिन्दू धर्म में लोग सांपों को बहुत महत्व देते हैं। हिन्दू कैलेंडर में अनुसार श्रावण मास की शुक्ल पंचमी को नाग पंचमी के रूप में मनाया जाता है।जिस पर आज सावन का तीसरा सोमवार भी है । शिव भक्तों के लिए श्रावण महीने का विशेष महत्व होता है। यह महीना पूर्ण रूप से भगवान शिव को समर्पित होता है और भगवान शिव के जीवन में सांपों का विशेष स्थान रहा है इसलिए यह दिन शिव भक्तों के लिए और भी खास हो जाता है। नाग पंचमी के दिन नाग देवता को दूध, चावल और फूल आदि समर्पित कर पूजा की जाती है ताकि भक्तों को उनका आर्शीवाद मिलें। हिन्दुओं का यह त्योहार भारत के कई हिस्सों में मनाया जाता है।


फर्रुखाबाद में भी नाग पंचमी का त्योहार जिले में धूमधाम से मनाया जा रहा है । इस मौके पर सपेरों ने घर-घर जाकर सांप दिखाए।श्रीमहाकाल मंदिर में नागपति वासुक के प्राकट्योत्सव पर विशेष पूजन हुआ। मंदिर में स्थित तक्षक नागचंद्र मौलेश्वर का पूजन करने के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। नौ नाग देवता के फन पर स्थापित शिव, पार्वती व गणेश की पूजा की गई।
कई श्रद्धालुओं ने काल सर्प दोष का पूजन भी कराया। पुरोहितों ने मंत्र पढ़कर दोष निवारण को विशेष पूजन किया। प्रात:काल भस्म आरती के दर्शन को भी शिवभक्तों की भीड़ जुटी। भस्म आरती के बाद महामृत्युंजय का सस्वर पाठ मुनि अलौकिक व अर्चना दीक्षित ने किया।घरों में भी नागपंचमी का पूजन श्रद्धा व भक्ति के साथ किया गया। घर के दरवाजे पर नाग देवता बनाकर दूध छिड़ककर पूजन किया गया। कई घरों में नागराज के मंत्र लिखकर भी चिपकाए गए। नाग पंचमी के अवसर पर सुबह से ही सपेरे घर-घर जाकर सांपों को दिखाने लगे। लोगों ने सांपों को दूध पिलाया और सपेरों को दक्षिणा दी। सपेरों ने भी घर-घर और दुकान-दुकान जाकर सांप दिखाकर खूब कमाई की।

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