2 सितम्बर को गणपति बप्पा की मूर्ति की स्थापना का शुभ महूर्त सुबह 8 बजे से : आचार्य प्रदीप शुक्ला

हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी विघ्नहर्ता गणेश भगवान का आगमन 2 सितम्बर को हो रहा है। प्रथम देव भगवान गणेश का पूजन सुबह प्रात: काल से लेकर शाम तक कर सकते है। मूर्ति स्थापना का समय 04 बजे से पूर्व उत्तम रहेगा।

सिटी हलचल को आचार्य प्रदीप शुक्ला ने यह जानकारी दी। कि श्रीगणेश पूजा अपने आपमें बहुत ही महत्वपूर्ण व कल्याणकारी है। चाहे वह किसी कार्य की सफलता के लिए हो या फिर चाहे किसी कामनापूर्ति स्त्री, पुत्र, पौत्र, धन, समृद्धि के लिए या फिर अचानक ही किसी संकट मे पड़े हुए दुखों के निवारण हेतु हो।

अर्थात जब कभी किसी व्यक्ति को किसी अनिष्ट की आशंका हो या उसे नाना प्रकार के शारीरिक या आर्थिक कष्ट उठाने पड़ रहे हो तो उसे श्रद्धा एवं विश्वासपूर्वक किसी योग्य व विद्वान ब्राह्मण के सहयोग से श्रीगणपति प्रभु व शिव परिवार का व्रत, आराधना व पूजन करना चाहिए।विद्वान पंडित ने बताया कि श्रीगणेश चतुर्थी को पत्थर चौथ और कलंक चौथ के नाम भी जाना जाता है। यह प्रति वर्ष भाद्रपद मास को शुक्ल चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। चतुर्थी तिथि को श्री गणपति भगवान की उत्पत्ति हुई थी इसलिए इन्हें यह तिथि अधिक प्रिय है। जो विघ्नों का नाश करने वाले और ऋद्धि-सिद्धि के दाता हैं। इसलिए इन्हें सिद्धि विनायक भगवान भी कहा जाता है।

भगवान गणेश का पूजन विधि में उन्होंने बताया कि सर्व प्रथम स्नान स्वयं स्नान करें ओर मूर्ति को भी स्नान कराएं। धूप दीप नैवेद्य पान सुपाड़ी लौंग इलाइची फल फूल माला आदि से भगवान का शुद्ध चित्त मन से पूजन करना चाहिए। भगवान गणेश को मोदक बहुत प्रिय है। इसलिए उनको प्रसन्न करने के लिए मोदक का भोग लगाना चाहिए। हरि नाम संकीर्तन एवं अभिषेक करना चाहिए। गणेश अथर्व शीश का पाठ करना चाहिए।


आचार्य ने बताया कि दूध दही पंचामृत से अभिषेक करने से जातक के समस्त प्रकार के कष्ट मिट जाते हैं एवं घर मे व्यापार में सुख शांति बनी रहती है। बड़ी से बड़ी बाधा भी भगवान गणेश के पूजन से कट जाती है, जो जातक भगवान का पूजन नियम एवं सैयम से करता है उसके सारे काज सफल होते हैं।

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