इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़ शुरू की खेती, कर रहे लाखों की कमाई

आईपीएस बनने का सपना देख रहीं हिमाचल की कल्पना शर्मा, यूपी के टीचर श्याम मिश्रा और महाराष्ट्र के अनूप पाटिल ने युवाओं को कामयाबी की नई राह दिखाई है। अनूप तो पचास हजार की इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़ खेती से सालाना पचीस लाख कमा रहे हैं। श्याम ने तो मूली की उपज का देश में नया रिकार्ड बनाया है।

कई बार कुछ ऐसी हकीकतें सामने आती हैं, जो कामयाबी की मिसाल ही नहीं बनतीं, आम लोगों के लिए एक मजबूत प्रेरणा स्रोत भी बन जाती हैं। जैसे कि सुंदरनगर (हिमाचल) की महिला किसान कल्पना आईपीएस बनना चाहती थीं, लेकिन घरेलू संघर्षों ने तोड़ कर रख दिया था, लेकिन वह हार नहीं मानीं। सुंदरनगर के गांव डोढवां की 43 वर्षीय कल्पना शर्मा के पति की एक दिन रीढ़ की हड्डी टूट गई। नौकरी खोजने लगीं। कहीं नहीं मिली। घर खर्च चलाना मुश्किल हो गया। आजीविका के लिए सब्जी की खेती करने लगीं। आज वह प्रदेश के सफल किसानों में शुमार हैं।

इसी तरह बलिया (उ.प्र.) के गांव मलिहाऊ निवासी श्याम मिश्र ने तो खेती में कमाल ही कर दिया है। वह टीचिंग के जॉब में रहे हैं। गिनी-गिनाई पगार से घर-गृहस्थी का खर्च निकालना मुश्किल होने लगा लेकिन एक दिन पंजाब के किसान करतार सिंह की संगत ने उनके जीवन की दिशा ही बदल दी। अब अपने इलाके के सबसे धनी किसान बन चुके हैं। उन्होंने मूली की खेती से कमाई का नया रिकॉर्ड बनाया है।

श्याम मिश्र करतार सिंह से एक दिन 1,100 रुपये प्रति किलो के भाव से मूली का बीज खरीद लाए। उन्होंने एक बीघा में साढ़े सात सौ ग्राम बीज के अनुपात से चार एकड़ में मूली की बोआई कर दी। फसल तीन महीने में ही तैयार हो गई। बीज खरीदते समय उन्हें बताया गया था कि उससे वह प्रति बीघा चार सौ कुंतल मूली का उत्पादन कर लेंगे लेकिन वह रिकार्ड तोड़ते हुए प्रति बीघा सात सौ कुंतल मूली पैदा कर दी। इसमें कुल लागत मात्र छह हजार रुपए आई, जबकि कमाई प्रति बीघे बत्तीस हजार रुपए हुई। दरअसल, मूली की फसल को आयुर्वेदिक दवा कंपनियों को भारी मात्रा में मूली की जरूरत होती है। वे दो रुपए प्रति किलो मूली खरीद लेती हैं। एक दवा ऐसी ही दवा कंपनी के साथ एग्रीमेंट ने श्याम मिश्रा को मालदार बना दिया है। उनकी उपज ने पंजाब में मूली की उन्नत खेती का भी रिकॉर्ड तोड़ दिया है।

इसी तरह के सांगली (महाराष्ट्र) के गांव नागराले के युवा किसान हैं अनूप पाटिल, जिनकी उम्र अभी मात्र अट्ठाईस साल है। वह पुणे की एक कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे। अच्छी सैलेरी भी मिल रही थी लेकिन अपनी जिंदगी में कुछ अलग कर दिखाना चाहते थे। दो साल पहले नौकरी छोड़कर वह गुजरात, कर्नाटक और महाराष्ट्र के सफल किसानों से मिलने निकल पड़े। उसके बाद बाजार में फसलों के मोल-तोल का जायजा लिया। कई नई जानकारियां मिलीं। इसके बाद अपने गांव नागराले लौटकर अपने बारह एकड़ खेत में शिमला मिर्च, मक्का, गन्ना और गेंदे के फूल की खेती करने लगें। अब उन्हे हर साल 25 लाख रुपए की कमाई हो रही है यानी हर महीने दो लाख रुपए से ज्यादा, जबकि नौकरी में उन्हे पचास हजार रुपए महीने मिलते थे।

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