आलू किसानों के जख्मों पर मरहम लगा रही मक्का

आलू में घाटा झेल रहे किसानों को मक्का की फसल कुछ राहत दे रही है। पहले गर्मी में होने वाली मक्का की फसल में किसानों को बेहतर भाव मिला। अब बारिश की मक्का की आमद कृषि उत्पादन मंडी समिति में शुरू हो गई है। इससे मक्का का भाव 150 रुपये क्विंटल गिर गया है। इसके बावजूद अभी भी गेहूं से मक्का का रेट अधिक है। बरसात वाली मक्का का भाव इस समय 1750 से 1950 रुपये प्रति क्विंटल चल रहा है।10 दिन पूर्व तक जब नई मक्का नहीं आई थी तब बेहतर गुणवत्ता वाली मक्का का भाव 2100 रुपये प्रति क्विंटल था। गर्मी वाली मक्का 2200 रुपये तक काफी दिन बिकती रही। \


कृषि उत्पादन मंडी समिति में किसानों की मक्का खरीदकर व्यापारी गुजरात, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा व महाराष्ट्र की मंडियों में भेज रहे हैं। इस समय गेहूं 1900 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है। इस तरह अभी भी मक्का का भाव गेहूं से ऊपर है।
आढ़ती संघ के अध्यक्ष संजय कमल का कहना है कि पिछले दिनों बारिश के कारण इस मौसम की मक्का की आमद देर से मंडी में हुई है। उनका कहना है कि आलू में घाटा झेल रहे किसानों को मक्का ने काफी राहत दी है। इसके चलते मक्का का रकबा जनपद में बढ़ा है।


स्थापना के बाद कई वर्षों तक घाटे में रही मंडी समिति की आमदनी इस समय 2 करोड़ रुपये सालाना पहुंच गई है। कृषि उत्पादन मंडी समिति कमालगंज में इस समय 34 गल्ला आढ़तें हैं। 1990 के दशक में संचालित मंडी समिति में पहले केवल तीन आढ़तें थीं। मक्का की देश भर में मांग बढ़ने से गल्ला आढ़तें बढ़ती गईं। आमदनी भी साल दर साल बढ़ रही है।


2017-18 में मंडी की आय का लक्ष्य 1.25 करोड़ था, जबकि आय 1.40 करोड़ हुई। वहीं 2018-19 में 1.68 करोड़ लक्ष्य के सापेक्ष 1.80 करोड़ आमदनी हुई। चालू वित्तीय वर्ष 2019-20 में 2.19 करोड़ आय के लक्ष्य के सापेक्ष अप्रैल से सितंबर तक छह माह में 1 करोड़ 10 लाख 94 हजार आमदनी हो चुकी है। सचिव रामप्रकाश दुबे का कहना है कि चालू वित्तीय वर्ष का लक्ष्य आसानी से पूरा होने की संभावना है।

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