प्रसव के बाद होने वाली मौतें रोकें : डॉ दलवीर

प्रसव के बाद अत्यधिक खून बहने से होने वाली मौत रोकने के लिए मोहमदावाद, नवावगंज, बरौन और राजेपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में तैनात स्टाफ़ नर्स, ईएमटी का गुरुवार को डॉ राममनोहर लोहिया महिला चिकित्सालय में उन्मुखीकरण किया गया |
अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ दलवीर सिंह ने बताया कि प्रसव काल के दौरान तेज गति से हो रही ब्लीडिंग (पी०पी०एच०) के सही समय पर नहीं रुकने के कारण काफी महिलाओं की मौत हो जाती है। कभी अस्पताल तक पहुंचने में देरी हुई तो कभी सही उपचार मिलने में देरी से कई महिलाएं असमय मृत्यु का शिकार हो जाती है , ऐसी मौत के ग्राफ को लाइफ रैप या नॉन न्यूमैटिक एंटी शॉक गारमेंट से काफी हद तक कम किया जा सकता है | नॉन न्यूमैटिक एंटी शॉक गारमेंट ऐसी महिलाओं के लिए वरदान साबित हो रहा है।


डॉ सिंह ने बताया कि बूस्ट प्रोग्राम के तहत इस तकनीक को टीएसयू ने जनपद के तीन स्वास्थ्य केन्द्र जिला महिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कमालगंज एवं कायमगंज में उपलब्ध कराया था| इसके प्रयोग से अब तक काफी महिलाओं की जान बचाई जा चुकी है| इसे देखते हुए अब इसका प्रयोग राजेपुर और नवावगंज में भी शुरू हो चुका है। इसके साथ ही बचे हुए सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर शीघ्र ही इस तकनीक को लागू कर दिया जायेगा | वहीं मई 2018 से अब तक लगभग 75 महिलाओं पर इसका प्रयोग कर उनकी जान बचायी जा चुकी है |


प्रशिक्षण के दौरान स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ जूही पाल ने बताया कि सामान्य तौर पर प्रसव के 3-5 मिनट के बाद रक्त का बहना बंद हो जाता है। लेकिन पी०पी०एच० के मामलों में गर्भाशय की मांसपेशियां न सिकुड़ने से रक्त लगातार बहता रहता है। कई बार मरीज कोमा में आ जाता है या फिर हृदय के काम करना बंद कर देने पर उसकी मृत्यु भी हो जाती है। ऐसे में नॉन न्यूमैटिक एंटी शॉक गारमेंट के प्रयोग से प्रसव पश्चात् रक्तस्त्राव को नियंत्रित किया जा सकता है |
डॉ जूही ने बताया कि लाइफ रैप या नॉन न्यूमैटिक एंटी शॉक गारमेंट ऐसे मामलों में जान गंवाने वाली महिलाओं के लिए वरदान साबित हो रहा है। यह गारमेंट पी०पी०एच० से पीड़ित महिला के पैरों से लेकर पेट तक लपेट या कस कर बाँध दिया जाता है| इस कारण रक्त का प्रवाह गर्भाशय और पैरों की ओर न होकर दिमाग और हृदय की ओर होने लगता है |


लाइफ रैप न सिर्फ दिमाग और हृदय तक रक्त के प्रवाह को सुचारू कर देता है बल्कि सही इलाज मिलने तक के लिए 4-5 घंटों की अवधि को बढ़ा भी देता है यानि सभी स्त्री व प्रसूति रोग विशेषज्ञों की एंबुलेंस में इसकी सुविधा प्रसव काल के दौरान कई महिलाओं की जान को बचा सकती है। साथ ही उन्होंने कहा कि इसका प्रयोग केवल कुछ जनपदों में न होकर पूरे प्रदेश में होना चाहिए क्योंकि यह पी०पी०एच० से होने वाली मौतों को रोकने में बेहद उपयोगी है |

घातक है पी.पी.एच

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार यदि एक स्वस्थ गर्भवती महिला को पी०पी०एच० हो जाता है और उसे समय पर इलाज़ न मिले तो कुछ घंटों में ही वह दम तोड़ सकती है। यही नहीं पी०पी०एच० मातृ मृत्यु होने की एक प्रमुख वजह भी है। Global causes of maternal death: a WHO systematic analysis के अनुसार विश्व में कुल होने वाली मातृ मृत्यु में से 27 प्रतिशत मौतें पी०पी०एच० के कारण होती हैं | ऐसे में पी०पी०एच० के कारण होने वाली मौतों को नॉन न्यूमैटिक एंटी शॉक गारमेंट के प्रयोग से काफी हद तक कम किया जा सकता है |
इस दौरान डीपीएम कंचनबाला, उत्तर प्रदेश तकनीकी सहयोग इकाई से डीटीएस डॉ अभिलाष सिंह, नर्स मेंटर इवान्शी आदि लोग मौजूद रहे |

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