रोज 30 लीटर दूध देने वाली गाय खरीदने के लिए लगी भीड़, जानें कितने में बिकी

उत्तर प्रदेश के बलिया में लगने वाले ददरी मेला के नन्दीग्राम पशु मेला में शुक्रवार को जिले के किशुनीपुर निवासी सीआरपीएफ के पूर्व सूबेदार हरेराम यादव की चितकबरी फिलजियन नस्ल की गाय 77 हजार रुपये में बिकी। इस गाय पर कल से ही ग्राहक मंडरा रहे थे, लेकिन मोल-भाव में पटरी नहीं बैठ रही थी। आज आलमपुर निवासी गंगा विष्णु सिंह ने गाय को खरीदकर अपने घर ले गये।

पूर्व सूबेदार यादव ने गाय की खासियत बताते हुए कहा कि यह गाय रोजाना 30 लीटर दूध देती है। इसे तीन किलो सुधा दाना सहित अन्य पौष्टिक दाना के साथ ही चार किलो हारा चारा और पांच किलो भूसा एक शाम खिलाते थे। बच्चा देने के कुछ दिनों तक गाय तीन बार दोहना पड़ता है। सबसे खास यह है कि वह इस बछिया को पंजाब से आठ महीने पूर्व लाये थे। खिलाने के बदौलत यह जल्द तैयार हो गयी। पशु मेला में खरीद-बिक्री बढ़ने से नगरपालिका की आय बढ़ी है। इस गाय को देखने के लिए दर्जनों लोगों की भीड़ लगी रही।

पशुओं से पटा ददरी का नन्दगीग्राम पशु मेला 

बलिया। ददरी मेला का नन्दीग्राम पशु मेला शुक्रवार को परवान पर था। मेला क्षेत्र में चहुंओर बैल, गाय व बछड़ों की आवाज आ रही थी। कारोबारी गाय खरीदने के लिए व्यारियों से गाय को तम्बू बाहर निकालकर चलाकर और हर तरह से परख रहे थे। इस दौरान बिक्री हुई पशुओं को ग्राहक द्वारा ढलान पर ले जाकर ट्रकों व पिकअप में चढ़ाये जाने का क्रम पूरे दिन चलता रहा। मोल-भाव के शोर के बीच खूब खरीद-बिक्री हो रही थी। दुधारू पशुओं की बिक्री बढ़ने से दूर-दराज से आये व्यापारियों में काफी खुशी थी। उन्हें अपने पशुओं में आशा के अनुरूप मुनाफा हो रहा था।

बारह दिन में नगरपालिका ने कमाये 20 लाख 58 हजार

ददरी के नन्दीग्राम पशु मेला में नगरपालिका की आय 20 लाख 58 हजार हुई है। (यह आंकड़ा 28 अक्तूबर से आठ नवम्बर की प्रथम पाली का ही है) यह आंकड़ा पिछले वर्ष 2018 के 12 दिनों की तुलना में पांच लाख अधिक है। नपा के आंकड़ों के हिसाब से वर्ष 2018 के पशु मेला में अडी से पूरे मेले में मात्र 70 हजार की आय हुई थी, जबकि इस बार बारह दिन में अडी से 74 हजार रुपये की आय हुई है, जबकि मेला अभी एक सप्ताह शेष है, ऐसे में अडी से भी आय बढ़ने की संभावना है। शुक्रवार को प्रथम पाली यानि दोपहर तक नगरपालिका की आय 66 हजार थी।

दिन में सतुआ चटनी, रात में लिट्टी का व्यापारी ले रहे आनन्द

ददरी मेला के नन्दीग्राम पशु मेला इन दिनों शवाब पर पहुंच गया है। मेला में लगे सतुआ  के दुकानों पर दूर-दराज से पशु लेकर आये व्यापारी से लगायत खरीदारों तक की जमघट दोपहर में इन दुकानों पर देखते को मिल रही है। मेला के पुरानी शानों शौकत के बखान के साथ राजनीति देश ही अंतर्राष्ट्रीय राजनीति पर चर्चाओं के बीच आधा किलो तीन पाव सत्तू, मरीचा व प्याज गटक जा रहे हैं। सतुआ के साथ आज के चाउमीन, बर्गर, इटली, डोसा खाने वाले युवकों पर तंज कसने के साथ आज के युवकों के शारीरिक दुर्बलता का मजाक उड़ाने से नहीं चुक रहे हैं। दूसरी ओर बलिया जिले की लिट्टी आस-पास के जिलों में मशहूर हैं, इसकी मांग पशु मेला के दौरान काफी बढ़ जाती है। आजकल शाम के सात बजने के बाद टेंट तम्बू के आस-पास उपला जलाकर खूब लिट्टी सेंकी जा रही है, जो मेला के इतिहास को बयां कर रही है।

‘गाड़ा, बहेंगवा, ताखी ना राखे एको बाकी…’

बलिया। ददरी के नन्दीग्राम पशु मेला में आये दूर-दराज से आये व्यापारियों द्वारा गाय, भैंस, घोड़ा के साथ थोड़ी बहुत ही सही बैलों की खरीद-बिक्री हो रही है। मेला सिवान से आये एक बुजुर्ग व्यापारी ने शुक्रवार को ‘हिन्दुस्तान’ से बातचीत बीते जमाने की बात बताते हुए कहा कि जब बैल से खेती हुआ करता था। उस समय सोकन, धवरा व मैना बैल सबसे ज्यादा खरीदे जाते थे, लोगों में मान्यता था कि इस रंग के बैल हल में तेज चलते हैं। वहीं गाय व भैंस के लिए उन्होंने बताया कि दुधारूओं में ‘गाड़ा, बहेंगवा, ताखी ना राखे एको बाकी’ अवगुण पशु स्वामी के लिए अच्छी नहीं मानी जाती है और यह गरीबी के दिन लाने वाली कही जाती है। वैसे गाय माता होती है। वहीं बैलों के पैर में टनक न हो खरीदारी के समय इसका ख्याल रखा जाता है।

झूला, चर्खी को तैयार करने में जुटे कारीगर

ऐतिहासिक ददरी के नन्दीग्राम पशु मेला के बाद कार्तिक पूर्णिमा से ददरी मेला शुरू होता है। इसके मद्देनजर प्रदेश के शहरों से आये झूला व चर्खी वाले अपने आइटों को सलीके से तैयार करने में पूरी मुस्तैदी से जुटे हैं। इस वर्ष ददरी मेला में ड्रैग झूला के अलावा बच्चो के लिए कई आकर्षक नये झूले आये हैं, जो बच्चों को आकर्षण का केन्द्र बनेंगे। इसके साथ ही अन्य दुकानदार भी अपने दुकानों को टेंट आदि लगाकर सजाने-संवाने में पूरे मुस्तैदी से लगे हैं।

भूसा की बढ़ी बिक्री

नन्दीग्राम पशु मेला में पशुओं की संख्या बढ़ने के साथ ही मेला में भूसा सहित दाना व चारा की बिक्री बढ़ गयी है। इससे मेला में दुकानदारों में खुशी है। शुक्रवार को भूसा के टाल पर खरीदारों की भीड़ देखी गयी। खपत अधिक होने से व्यापारियों की खूब चांदी कट रहे हैं। व्यापारियों ने भूसा का रेट आठ रुपये किलो से लगायत 12 रुपये किलो तक रख गया है।

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